प्राइम टाइम/गोगुंदा: सितंबर में शुरू हुए पृथ्वी संरक्षक कोर्स (कक्षा 3 से 5) का छात्र लर्निंग शोकेस 12 दिसंबर को मदारडा स्कूल में आयोजित किया गया। जिसमें केशवपुरा के छात्र भी शामिल हुए। 16 सप्ताह तक चले इस कोर्स में बच्चों ने जो सीखाया उसे कोर्स के समापन पर प्रस्तुत किया।
हर बच्चे ने शिक्षक बनकर पौधों के लाभ, औषधीय पौधे, पौधे का जीवन चक्र, कचरा प्रबंधन, खाद्य श्रृंखला, पौधों के भाग, खाद और मिट्टी के बारे में जानकारी दी। साथ ही बच्चों ने नाट्य प्रस्तुति (स्किट) भी की। जिसमें कचरा प्रबंधन और बीज से पौधे तक की जीवन यात्रा को रोचक तरीके से दिखाया और एक संदेश भी दिया।
यह कोर्स जलवायु परिवर्तन को ध्यान में रखते हुए पर्यावरण शिक्षा को अनुभवात्मक रूप से जोड़ने के उद्देश्य से अनकोंम्प्रोमाइस्ड संस्था द्वारा पाठ्यक्रम विकसित एवं संचालित भी किया गया। इसमें बच्चे सिर्फ सस्टेनेबिलिटी के बारे में पढ़ते ही नहीं, बल्कि उसे अनुभव भी करते हैं। क्लासरूम से बाहर की गतिविधियाँए इंटरएक्टिव लर्निंग और पृथ्वी संरक्षण से जुड़े प्रोजेक्ट्स बच्चों को एक विद्यार्थी से पृथ्वी के संरक्षक बनने की दिशा में प्रेरित करते हैं। नन्हे संरक्षक इस ज्ञान को अपने माता पिता और समुदाय तक भी पहुँचाते हैं और आगे भी साझा करते है ।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में श्री नाहर सिंह देवड़ा, भादवीगुड़ा एवं विजयबावड़ी के सरपंच, पीईओ भादवीगुड़ा, गिरीश व्यास, सीबीईओ गोगुंदा प्रेरणा नौसालिया, गाँव के सरपंची और कर्नल (रिटायर्ड) सिराजुद्दीन सहित अन्य अतिथि उपस्थित रहे। सभी ने बच्चों के आत्मविश्वास और ज्ञान साझा करने के कौशल की सराहना की। सीबीईओ प्रेरणा नौसालिया ने कहा कि बच्चों की आदतों में पर्यावरण के प्रति जो प्रेम विकसित हुआ है वह अविस्मरणीय है। उन्होंने सभी को धन्यवाद दिया। कर्नल सिराजुद्दीन ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्र से आने वाले विद्यार्थियों को अपनी धरती और पर्यावरण का ज्ञान होना दिल को छू लेने वाला अनुभव है।
इस कोर्स से बच्चों में बोलने का आत्मविश्वास बढ़ा और अनुभव आधारित शिक्षा और प्रोजेक्ट के माध्यम से विद्यार्थियों ने वैज्ञानिक दृष्टिकोण, नेतृत्व क्षमता, रचनात्मकता तथा पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी जैसे महत्वपूर्ण कौशल विकसित किए हैं।
