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August 28, 2026 11:42 am

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पुनावली वृद्ध दंपती हत्याकांड का पर्दाफाश, पड़ोसी ने साथियों के साथ रची थी लूट की साजिश; पांच गिरफ्तार

गोगुंदा। थाना सायरा क्षेत्र के पुनावली गांव में 70 वर्षीय लेहरीलाल पालीवाल और उनकी 67 वर्षीय पत्नी राधाबाई की सनसनीखेज दोहरे हत्याकांड का पुलिस ने खुलासा कर दिया है। पुलिस ने मामले में पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार वारदात का मुख्य सूत्रधार मृतक दंपती का पड़ोसी कुशल उर्फ खुशी पालीवाल था। आर्थिक तंगी और बढ़ते कर्ज के चलते उसने वृद्ध दंपती के घर में लूट की योजना बनाई और अपने साथियों के साथ मिलकर वारदात को अंजाम दिया। पुलिस ने वारदात में प्रयुक्त वाहन भी बरामद किया है।

12 अगस्त को सामने आया था दंपती के लापता होने का मामला

पुलिस के अनुसार 12 अगस्त 2026 को पुनावली निवासी धूलीराम पालीवाल ने सायरा थाने में रिपोर्ट दी कि उनके बड़े भाई लेहरिलाल और भाभी राधाबाई घर पर नहीं हैं। आसपास के लोगों ने बताया था कि दोनों घर पर दिखाई नहीं दे रहे थे और घर का गेट खुला पड़ा था। परिजनों ने दोनों के मोबाइल नंबरों पर संपर्क करने का प्रयास किया, लेकिन फोन बंद मिले। रिश्तेदारों और परिचितों से भी जानकारी जुटाई गई, मगर दोनों का कोई पता नहीं चला।

रिपोर्ट के आधार पर एमपीआर क्रमांक 39/2026 दर्ज कर जांच शुरू की गई। पुलिस ने गुमशुदा दंपती की तलाश के लिए विशेष टीम गठित की। टीम ने मौके पर जाकर जांच की और आसपास के लोगों से पूछताछ की। मृतक के मोबाइल नंबरों की कॉल डिटेल और लोकेशन भी खंगाली गई।

घर के संदूक से मिले दोनों के शव

तलाश के दौरान 14 अगस्त को पुलिस को लेहरिलाल के मकान से दुर्गंध आने की जानकारी मिली। संदेह के आधार पर घर की तलाशी ली गई तो मकान के अंदर लोहे के बड़े संदूक में प्लास्टिक की थैलियों में पैक दोनों शव मिले। पुलिस के अनुसार शवों को कार्टन टेप से पैक कर संदूक में बिस्तरों के नीचे छिपाया गया था।

घटना की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अधीक्षक डॉ. अमृता दुहन मौके पर पहुंचीं। एफएसएल टीम, डॉग स्क्वाड और मोबाइल अनुसंधान इकाई को बुलाकर घटनास्थल से आवश्यक साक्ष्य एकत्र किए गए तथा क्राइम सीन को सुरक्षित किया गया। दोनों शवों को महाराणा भूपाल राजकीय चिकित्सालय, उदयपुर की मोर्चरी में रखवाया गया।

पुलिस के सामने चार बड़ी चुनौतियां

दोहरे हत्याकांड की जांच में पुलिस के सामने मुख्य रूप से अज्ञात आरोपियों की पहचान करना, हत्या का कारण पता लगाना, घटनास्थल सुनिश्चित करना और हत्या के बाद शवों को पैक कर छिपाने के पीछे की वजह का पता लगाना चुनौती थी। पुलिस ने इन बिंदुओं को केंद्र में रखकर जांच आगे बढ़ाई।

पुलिस ने एफएसएल, डॉग स्क्वाड और मोबाइल अनुसंधान टीम को मौके पर बुलाकर साक्ष्य जुटाए। इसके बाद तकनीकी और मनोवैज्ञानिक विश्लेषण के साथ पारंपरिक तथा आधुनिक अनुसंधान तकनीकों का इस्तेमाल किया गया। अलग-अलग स्तर से सूचनाएं एकत्र कर संदिग्धों की गतिविधियों और उनके संपर्कों की पड़ताल की गई।

एक साल पहले से चल रही थी साजिश

पुलिस जांच में सामने आया कि मुख्य आरोपी कुशल पालीवाल मृतक दंपती की आर्थिक स्थिति और दिनचर्या से परिचित था। पुलिस के अनुसार लेहरिलाल के पास काफी पैसे थे और वह लोगों को उधार भी देते थे। दंपती घर में अकेले रहते थे। इसी वजह से कुशल के मन में उनके घर में चोरी करने का विचार आया।

पुलिस के अनुसार इस वारदात की प्लानिंग करीब एक से डेढ़ साल पहले शुरू हुई थी। कुछ माह पूर्व कुशल अपने साथी चंदन के साथ गांव में रेकी करने आया था। रेकी के बाद उसने विकास खरवड़ और दिलीप चौधरी को भी योजना में शामिल कर लिया। वारदात से करीब एक माह पहले आरोपियों ने पूरी योजना को अंतिम रूप देना शुरू कर दिया था।

गुजरात से आए आरोपी, पहले की रेकी

जांच के अनुसार कुशल पालीवाल अपने साथियों चंदन यादव, विकास खरवड़ और दिलीप चौधरी के साथ चंदन की कार से 9 अगस्त को गोगुंदा होते हुए सायरा क्षेत्र में पहुंचे। रास्ते में पानोरिया की भागल में आने के बाद आरोपी कुछ समय घूमे और फिर गोगुंदा टोल के पास होटल में कमरा लेकर रुके।

अगले दिन 10 अगस्त को कुशल और चंदन पुनावली पहुंचे। दोनों ने मृतक दंपती के घर और उनकी दिनचर्या की जानकारी जुटाई। पुलिस के अनुसार आरोपियों ने यह भी पता लगाया कि घर में कौन-कौन आता-जाता है और किस समय दंपती अकेले रहते हैं।

पहले प्रयास में नहीं मिली सफलता

10 अगस्त को कुशल और चंदन मृतक दंपती के घर पहुंचे। कुशल ने पड़ोसी होने का फायदा उठाया और राधाबाई ने दोनों को घर में प्रवेश दे दिया। आरोपियों ने कुछ समय घर में रुककर मौका देखने की कोशिश की, लेकिन लोगों की आवाजाही के कारण वारदात का मौका नहीं मिला। इस दौरान कुशल ने घर में रखी हथौड़ी को अपने साथ छिपा लिया और दोनों बाहर निकल गए।

इसके बाद आरोपी पुनावली के आसपास वाहन में घूमते रहे। रात में पराड़ा के आसपास जगह देखकर वाहन में ही सो गए। 11 अगस्त की सुबह दोनों ने फिर वारदात को अंजाम देने का प्रयास किया, लेकिन घर का दरवाजा बंद होने के कारण अंदर प्रवेश नहीं कर सके। इसके बाद आरोपी नाथद्वारा होते हुए उदयपुर चले गए।

जन्मपत्री दिखाने के बहाने घर में घुसाया

पुलिस के अनुसार आरोपियों ने इसके बाद जीवन पालीवाल और किशन पालीवाल की मदद लेने की योजना बनाई। दोनों पहले से आरोपियों को दंपती की गतिविधियों और घर की जानकारी देने में सहयोग कर रहे थे।

जीवन और किशन जन्मपत्री दिखाने के बहाने वृद्ध दंपती के घर पहुंचे। राधाबाई ने दोनों को घर में प्रवेश दिया। दोनों ने राधाबाई का ध्यान दूसरी ओर लगाया और ऊपर की मंजिल पर लेहरिलाल के पास चले गए। इसी दौरान कुशल घर में छिप गया। कुशल ने जीवन और किशन को संदेश भेजकर बाहर जाने को कहा। इसके बाद दोनों बाहर निकल गए और कुशल ने अपने साथियों को अंदर बुला लिया।

सो रहे लेहरीलाल की हत्या के बाद शव छिपाया

पुलिस के अनुसार कुशल ने अपने साथियों चंदन यादव, विकास खरवड़ और दिलीप चौधरी को मुख्य दरवाजे से घर में प्रवेश कराया। इसके बाद सभी ऊपर की मंजिल पर पहुंचे। पुलिस के मुताबिक कुशल ने सो रहे लेहरिलाल पर हथौड़े से वार कर उनकी हत्या कर दी।

इसके बाद आरोपियों ने घटनास्थल की सफाई की और शव को प्लास्टिक की थैली में पैक कर कार्टन टेप से बंद किया। शव को लोहे के बड़े संदूक में रखा गया। इस दौरान राधाबाई को घटना की जानकारी नहीं हुई, क्योंकि वह नीचे वाले कमरे में सो रही थीं और कमरा अंदर से बंद था।

राधाबाई के जागने पर उनकी भी हत्या

पुलिस के अनुसार आरोपियों ने राधाबाई के जागने का इंतजार किया। सुबह जब राधाबाई उठकर स्नान के लिए जाने लगीं, तब चंदन ने उन्हें रोकने का प्रयास किया और कुशल ने उनकी हत्या कर दी। इसके बाद आरोपियों ने राधाबाई के पहने हुए आभूषण तथा अलमारी की चाबी से अलमारी खोलकर अन्य आभूषण और नकदी अपने कब्जे में ले ली।

दोनों शवों को प्लास्टिक की थैलियों और कार्टन टेप से पैक कर उसी लोहे के संदूक में रखा गया। शवों के ऊपर बिस्तर डाल दिया गया, ताकि संदूक सामान्य दिखाई दे और शवों से आने वाली दुर्गंध से घटना का पता देर से चले।

मोबाइल हाईवे पर फेंककर पुलिस को गुमराह किया

वारदात के बाद आरोपी दंपती के मोबाइल फोन और वारदात में इस्तेमाल हथौड़े सहित अन्य सामान अपने साथ ले गए। पुलिस के अनुसार आरोपियों ने मृतकों के मोबाइल फोन चालू कर हाईवे के रास्ते में फेंक दिए, ताकि पुलिस की जांच दूसरी दिशा में चली जाए और आरोपियों तक आसानी से पहुंच न हो सके।

पुलिस के अनुसार वारदात के बाद मुख्य आरोपी और उसके साथी गांव से गायब हो गए, जबकि घटना की जानकारी मिलने तक आरोपियों ने खुद को सामान्य दिखाने का प्रयास किया। पुलिस के अनुसार आरोपियों ने ग्रामीणों के साथ मिलकर मृतक दंपती के लिए न्याय की मांग भी की, ताकि उन पर शक नहीं हो।

कर्ज में फंसे आरोपी ने लूट के लिए रची थी साजिश

जांच में पुलिस के अनुसार आरोपियों को महंगी जीवनशैली का शौक था। लोगों और बैंकों से लिए गए कर्ज की समय पर अदायगी नहीं हो पाने के कारण उन पर लगातार आर्थिक दबाव बढ़ रहा था। इसी आर्थिक परेशानी और पैसों की व्यवस्था करने की नीयत से आरोपियों ने लूट की योजना बनाई और वृद्ध दंपती को निशाना बनाया।

पांच आरोपी गिरफ्तार

पुलिस ने मामले में पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है—

1. कुशल उर्फ खुशी पालीवाल, पिता मांगीलाल, उम्र 26 वर्ष, निवासी पुनावली, थाना सायरा, हाल निवासी सूरत, गुजरात।
2. चंदन यादव, पिता प्रवीण यादव, उम्र 27 वर्ष, निवासी दौउटा दलसिंह सराय, जिला समस्तीपुर, बिहार, हाल निवासी सूरत, गुजरात।
3. दिलीप चौधरी, पिता कनकराम चौधरी, उम्र 30 वर्ष, निवासी अंबिका नगर, पांडेसरा, सूरत, गुजरात।
4. किशन पालीवाल, पिता देवीलाल पालीवाल, उम्र 21 वर्ष, निवासी पुनावली, थाना सायरा।
5. जीवन पालीवाल, पिता भेरूलाल पालीवाल, उम्र 21 वर्ष, निवासी पुनावली, थाना सायरा।

पुलिस टीम ने ऐसे किया खुलासा

इस जटिल हत्याकांड के खुलासे में सायरा थाना पुलिस के साथ जिला विशेष टीम और साइबर टीम की अहम भूमिका रही। टीम का नेतृत्व सायरा थाना अधिकारी शैतान सिंह ने किया। टीम में गोगुंदा थाना अधिकारी प्रवीण सिंह राजपुरोहित, जिला विशेष टीम (DST) प्रभारी भारतजी योगी, गोवर्धन विलास थाना अधिकारी सुनील चारण, साइबर सेल से फेलीराम उप निरीक्षक, बेकरिया थाना अधिकारी रामावतार मीणा, सायरा थाने के राजेंद्र सिंह, जिला साइबर टीम प्रभारी गजराज सिंह, भंवर सिंह, विक्रम सिंह, अखिलेश, गणपतनाथ, धर्मवीर, भरतसिंह, कुलदीप सिंह, जितेंद्र सिंह, कमलेश, भूपेंद्र सिंह, रामदयाल, चरण सिंह, नरेंद्र सिंह, भूपेंद्र सिंह, दिनेश सिंह, श्रवण, रूपाराम, पुष्पराज सिंह, वीरेंद्र, नरपत राम, लोकेन्द्र सिंह, हस्तीराम, लोकेश, धर्मेंद्र कुमार, भूपेंद्र सिंह, अप्रकाश, वीरेंद्र सिंह, सुमित, सुमेर सिंह, निंबाराम और शंभूराम सहित पुलिसकर्मी शामिल रहे।

पुलिस के अनुसार महानिरीक्षक पुलिस उदयपुर रेंज उदयपुर गौरव श्रीवास्तव के निर्देशन तथा पुलिस अधीक्षक उदयपुर डॉ. अमृता दुहन के नेतृत्व में गठित टीम ने तकनीकी, वैज्ञानिक और पारंपरिक जांच को साथ लेकर इस दोहरे हत्याकांड की गुत्थी सुलझाई।

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