प्राइम टाइम/गोगुंदा: उदयपुर जिले के गोगुंदा में इन दिनों राजनीतिक उठापटक चल रही है। कांग्रेस से सायरा प्रधान रहे सवा राम गमेती शनिवार को पार्टी की सदस्यता छोड़कर भाजपा में शामिल हो गए। उनके साथ कांग्रेस समर्थित करीब पांच सरपंच और कई कार्यकर्ता भी भाजपा में शामिल हुए। गौरतलब है अनबन के चलते कई दिनों से सवा राम गमेती कांग्रेस की बैठकों में शामिल नहीं हो रहे थे। कांग्रेस का आरोप है कि प्रधान सवा राम गमेती और कुछ सरपंचों ने मिलकर पूर्व मंत्री डॉ. मांगी लाल गरासिया को विधानसभा चुनाव में हरवाने का काम किया था। कांग्रेस की कई बैठकों में स्थानीय नेता लाल सिंह झाला सहित अन्य कार्यकर्ताओं ने सवा राम गमेती ओर इनके समर्थक कुछ सरपंचों पर भाजपा के साथ मिलीभगत का आरोप लगाया था। झाला ने कहा था कि इन्होंने भाजपा से मिलकर कांग्रेस को विधानसभा चुनाव एवं सायरा उपप्रधान के उपचुनाव में पार्टी को हराने का काम किया। इसके संबंध में ब्लॉक कांग्रेस कमेटी द्वारा सवा राम गमेती के विरुद्ध प्रदेश कांग्रेस कमेटी में भी शिकायत की थी और पार्टी से निष्कासित करने की मांग की थी।

सायरा प्रधान सवाराम गमेती, भानपुरा सरपंच प्रतिनिधि रोडा राम गमेती, सामल सरपंच प्रकाश गमेती, सिंघाड़ा सरपंच प्रतिनिधि फुलाराम गमेती, झालो का कलवाना सरपंच वालाराम गमेती, कडेच पूर्व सरपंच हंसा राम गमेती कांग्रेस छोड़ भाजपा में सम्मिलित हुए।
गोगुंदा विधायक प्रताप भील, देहात भाजपा जिलाध्यक्ष पुष्कर तेली ने भाजपा का उपरणा पहना कर सभी को भाजपा की सदस्यता दिलाई।

इस अवसर पर गोगुन्दा पूर्व प्रधान सुन्दर देवी, पूर्व उप प्रधान लक्ष्मण सिंह झाला, नांदेशमा मंडल अध्यक्ष नवल सिंह चदाणा, पूर्व जिला उपाध्यक्ष लक्ष्मण सिंह राव, नाहर सिंह देवड़ा, सुमेर सिंह, पूर्व उप प्रधान पप्पू राणा, सायरा मण्डल अध्यक्ष करण जोशी, गोगुंदा मंडल अध्यक्ष निखिल कोठारी, पूर्व मण्डल अध्यक्ष दिनेश सेन, पूर्व मण्डल अध्यक्ष बाबूलाल सुथार, पूर्व सरपंच वालसिंह, डीसी मेघवाल, लोकेश पालीवाल, तिरोल सरपंच जमना शंकर गमेती, ललिता जोशी आदि उपस्थित रहे।
इनका कहना है
“जब मेरी पत्नी सरपंच पर खड़ी हुई तो पूर्व मंत्री गरासिया ने हराने के प्रयास किए उसके बाद मुझे प्रधान बनने से रोकना चाहा। लाल सिंह झाला ने कहा था कि मैं विधायक की तैयारी करूं लेकिन बाद में वो ही मेरे विरोध में हो गए। मुझे सार्वजनिक मंच से अपमानित करते थे। मेरे ऊपर बेबुनियाद आरोप लगाते थे। जब मांगी लाल गरासिया को कांग्रेस से विधायक का टिकट नहीं मिल रहा था तो उन्होंने निर्दलीय चुनाव लडना चाहा इसी बात से आदिवासी नाराज थे और इन्हें चुनाव में वोट नहीं किया। बार बार अपमान से मै अपने घर बैठ गया लेकिन भाजपा नेताओं ने मुझे समाज सेवा करने की नसीहत देकर फिर से राजनीति में उतारा। अब आगे का राजनीतिक जीवन में भाजपा के साथ बिताना चाहता हु।
सवा राम गमेती
पूर्व प्रधान, सायरा
पूर्व प्रधान सवाराम के भाजपा में शामिल होने से कांग्रेस को नुक़सान नहीं: ब्लॉक अध्यक्ष
सायरा पंचायत समिति के पूर्व प्रधान सवाराम गमेती के भाजपा में शामिल होने से कांग्रेस पार्टी को कोई नुक़सान नहीं होगा बल्कि इससे कांग्रेस को फायदा ही है।
ब्लाक कांग्रेस कमेटी गोगुंदा (ए) के अध्यक्ष रामसिंह चदाणा ने कहा कि कांग्रेस पार्टी ने सवाराम गमेती को एक वोट से कडे संघर्ष में प्रधान बनाया था लेकिन सवाराम ने अपने कार्यकाल में हर जगह कांग्रेस पार्टी को नीचा दिखाने का प्रयास किया यहां तक की भाजपा विधायक प्रताप लाल के साथ राजनीतिक बैठकों में आए दिन मंच पर साझा किया करते थे। यही नहीं गत विधानसभा चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी डॉ. मांगीलाल गरासिया को हराने के लिए अपने कुछ सरपंचों को भाजपा पदाधिकारियों से एक होटल में 25 लाख से अधिक रुपए लेने का वीडियो सबके सामने आया था।
ब्लॉक अध्यक्ष चदाना ने कहा कि गत वर्ष सायरा पंचायत समिति उप प्रधान के उप चुनाव में कांग्रेस पार्टी का बहुमत होने के बावजूद प्रधान सवाराम ने भाजपा से सांठ-गांठ कांग्रेस के दो पंचायत समिति सदस्यों को गायब करवा दिया गया और मतदान नहीं करने दिया।
सवाराम ने प्रधान बनाने वाले कांग्रेस के पंचायत समिति सदस्यों को कभी मान सम्मान नहीं दिया और न ही उनके क्षेत्र में राशि स्वीकृत की बल्कि इसके विपरित पंचायत समिति के बजट की अधिकांश राशि की स्वीकृतियां भाजपा के सरपंचों की ग्राम पंचायतों में जारी की है जिसका प्रमाण पंचायत समिति रिकार्ड में उपलब्ध है।
यही नहीं सवाराम ने कांग्रेस कार्यकर्ताओं से भ्रष्टाचार के मामले में 35 से 40 प्रतिशत कमीशन अग्रिम राशि लेकर उनकी स्वीकृतियां निकाली। इनके काले कारनामे के कितने ही उदाहरण प्रदेश कांग्रेस कमेटी के महासचिव लालसिंह झाला के सामने आये है।
ब्लॉक कांग्रेस कमेटी ने तो उनकी पार्टी विरोधी गतिविधियों को देखते हुए पार्टी हाईकमान को 2 वर्ष पूर्व ही पार्टी से निकालने की अनुशंसा की थी। इसलिए पार्टी के साथ गद्दारी करने वाले लोगों के पार्टी से बाहर जाने से वैसे भी कांग्रेस पार्टी को कोई नुक़सान नहीं है।
आम जनता एवं कांग्रेस कार्यकर्ताओं को इनका असली चेहरा सामने आ गया है।