प्राइम टाइम/गोगुंदा: मेवाड़ अपने इतिहास, खूबसूरती और देशभक्ति के लिए पूरी दुनिया में मशहूर है। हर साल लाखों पर्यटक यहां आते हैं। लेकिन मेवाड़ में वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप के राजतिलक स्थल गोगुंदा में बहुत कम पर्यटक आते हैं। जबकि यह उदयपुर से भी ज्यादा खूबसूरत है और महाराणा प्रताप से जुड़ी एक अहम ऐतिहासिक गाथा का साक्षी भी है। लेकिन अब यहां जिले के दूसरी सबसे ऊंची चोटी धोलिया जी पर्वत को पर्यटन कि दृष्टि से विकसित करने के लिए आम बजट में घोषणा हो चुकी है। धोलिया जी पर्वत को विकसित करने ओर पर्यटक स्थल बनाने के लिए स्थानीय प्रशासन और विधायक ने एक प्रस्ताव तैयार कर राज्य सरकार को भेजा था। सरकार ने आम बजट में इसे विकसित करने ओर यहां सड़क, रोप वे सहित कई आकर्षक कार्य करने की घोषणा कर दी है। हालांकि बजट में इसकी लगत नहीं बताई गई है कि कितने पैसे यहां लगाएंगे जायेंगे लेकिन घोषणा होने से गोगुंदा सहित धोलिया जी को चाहने वाले लोगों में खासा उत्साह है। आपको बता दे यह स्थान अरावली की सबसे ऊंची चोटियों में से एक है जो एक बड़ा पर्यटन स्थल बनने जा रही है। दरअसल, उदयपुर शहर से गोगुंदा की दूरी करीब 35 किलोमीटर है और इससे करीब 7 किलोमीटर दूर धोलियाजी पर्वत है, जहां धोलियाजी बावजी का प्रसिद्ध स्थान है। गोगुंदा और इसके आसपास के इलाकों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां दर्शन के लिए आते हैं। यह स्थान पहाड़ी की चोटी पर स्थित है।

मजावडी के तुलसी भाई ने सबसे पहले निजी खर्च से बनाई सड़क, चर्चा में आया धोलिया जी धाम
पहले लोग यहां पगडंडियों के जरिए जाते थे, लेकिन गोगुंदा के मजावड़ी निवासी तुलसी प्रजापति ने अब पहाड़ तक पहुंचने के लिए पक्की सड़क बना दी है। जिससे अब दोपहिया चारपहिया वाहन आसानी से धोलियाजी पर्वत तक पहुंच सकते हैं। इससे पहले ऊपर तक जाने के लिए पगडंडी थी। इस पर्वत से बेहद खूबसूरत नजारा दिखता है। साथ ही ट्रैकिंग करके ऊपर जाते समय भी काफी अच्छा अनुभव मिलता है। यह अरावली की सबसे ऊंची चोटियों में से एक है और उदयपुर जिले में दूसरी सबसे ऊंची चोटी मानी जाती है। जिसकी ऊंचाई करीब 1183 मीटर है।

महाराणा प्रताप का यहां हुआ था यहां राजतिलक
गोगुंदा महाराणा प्रताप के राज्याभिषेक का स्थान है। इससे कुछ दूरी पर मायरा की गुफा है जो महाराणा प्रताप का शस्त्रागार हुआ करता था। मुगलों के खिलाफ लड़ाई की रणनीति यहीं से बनती थी। महाराणा उदय सिंह ने अपने अंतिम क्षण गोगुंदा में बिताए थे. उनकी मृत्यु भी यहीं हुई थी. फिर महाराणा प्रताप का राज्याभिषेक गोगुंदा में ही हुआ था। धोलियाजी पर्वत के बारे में कहा जाता है कि जब गोगुंदा मेवाड़ की राजधानी थी, तब इसी पर्वत से पूरे राजस्थान से निगरानी की जाती थी और सेना भी यहीं तैनात रहती थी जिसे जीतना आसान नहीं था।

ग्रामीणों ने बताया कि यह बेहद खूबसूरत जगह है। बेहतर पर्यटन स्थल विकसित होने के बाद यह जगह राजस्थान के प्रसिद्ध स्थलों में शुमार हो जाएगी। धोलियाजी पर्वत में पर्यटन क्षेत्र में काम करने की अपार संभावनाएं हैं। यहां पहाड़ तक जाने के लिए छोड़े रास्ते, रोप वे, बंजी जंपिंग, पैराग्लाइडिंग, मंदिर तक गलास पथ, महाराणा प्रताप की जीवनी, लेजर लाइट शो, छतरी वाटर फाउंटेन, सेल्फी पॉइंट, जंगल सफारी, चिल्ड्रन पार्क और कैफेटेरिया समेत कई सुविधाएं के साथ रोमांच शामिल हैं।
