प्राइम टाइम/गोगुंदा: क्षेत्र में पारंपरिक आस्था और सांस्कृतिक उत्साह का प्रतीक गणगौर महोत्सव इस वर्ष 21 से 23 मार्च तक धूमधाम से मनाया जाएगा। तीन दिवसीय इस मेले के दौरान प्रतिदिन प्रताप चौक स्थित चारभुजा जी मंदिर से गणगौर माता की भव्य सवारी निकाली जाएगी।यह सवारी पूरे नगर में भ्रमण करते हुए चौगान स्थित गणगौर घाट पहुंचेगी, जहां विधि-विधान से पूजा-अर्चना एवं धार्मिक कार्यक्रम आयोजित होंगे। मेले में बड़ी संख्या में श्रद्धालु एवं मेलार्थी भाग लेंगे। पारंपरिक वेशभूषा, लोकगीतों और नृत्यों से मेले की रौनक चरम पर रहेगी।

इतिहास से जुड़ी है गोगुंदा की गणगौर:
गोगुंदा की गणगौर का इतिहास अत्यंत रोचक और गौरवपूर्ण रहा है। मान्यता के अनुसार, कोटा की प्रसिद्ध गणगौर को उदयपुर के महाराणा स्वरूप सिंह के आदेश पर वीर लालसिंह द्वारा गोगुंदा लाया गया था। कहा जाता है कि लालसिंह ने अपनी सूझबूझ और साहस का परिचय देते हुए गणगौर को कोटा से “उड़ाकर” महाराणा को भेंट की थी। प्रसन्न होकर महाराणा ने उन्हें गोगुंदा में गणगौर सवारी निकालने की अनुमति प्रदान की, तभी से यहां यह परंपरा निरंतर चली आ रही है।

धिंगा गणगौर की परंपरा भी रही प्रचलित:
इतिहास में “धिंगा गणगौर” का भी विशेष उल्लेख मिलता है। मान्यता है कि महाराणा राजसिंह की रानी गणगौर पूजन भूल जाने पर नाराज हो गई थीं। उन्हें प्रसन्न करने के लिए परंपरा के विपरीत पुनः गणगौर मनाने का आदेश दिया गया, जिससे “धिंगा गणगौर” की परंपरा शुरू हुई। पूर्व में गोगुंदा में भी यह उत्सव मनाया जाता था।
नेजा और निशानेबाजी रही मेले की पहचान:
पुराने समय में गणगौर मेले के दौरान नेजा बांधकर उस पर निशानेबाजी की जाती थी। प्रतिभागी बंदूक से लक्ष्य साधते थे और सफल निशानेबाजों को सम्मानित किया जाता था। साथ ही गेहूं और मक्का की घुघरी प्रसाद के रूप में वितरित की जाती थी।बताया जाता है कि प्रारंभ में मेला राणेराव तालाब के पास भरता था, बाद में वर्ष 1955 में इसे चौगान में स्थानांतरित किया गया। यहां विभिन्न प्रतियोगिताओं और सांस्कृतिक आयोजनों की परंपरा शुरू हुई।
तीनों दिन अलग-अलग वेश में सजेंगी गणगौर माता:
महोत्सव के दौरान गणगौर माता को तीनों दिन अलग-अलग पारंपरिक वेशभूषा धारण करवाई जाती है।पहले दिन लाल पोशाकदूसरे दिन केसरिया/गुलाबी पोशाक और तीसरे दिन हरे रंग की पोशाक।
पर्यटन विभाग भी करेगा आयोजन:
वर्तमान में पर्यटन विभाग द्वारा उदयपुर एवं गोगुंदा में गणगौर महोत्सव को विशेष रूप से मनाया जाता है। इस दौरान सांस्कृतिक कार्यक्रम, लोकनृत्य और आकर्षक आतिशबाजी भी आयोजित की जाती है, जिससे मेले की भव्यता और बढ़ जाती है।