प्राइम टाइम/गोगुंदा: क्षेत्र के करदा गांव में पिछले दो दिनों से तेंदुओं की मौजूदगी से दहशत का माहौल बना हुआ है। गुरुवार देर रात वन विभाग की टीम को उस समय सफलता मिली, जब एक तेंदुए को पिंजरे में कैद कर सुरक्षित रेस्क्यू कर लिया गया। हालांकि, क्षेत्र में एक और तेंदुए के होने की आशंका के चलते ग्रामीणों में अब भी भय बना हुआ है। ग्रामीण कमलेश पालीवाल के अनुसार, गांव के आसपास पिछले दो दिनों से दो तेंदुओं की गतिविधियां देखी जा रही थीं, जिससे ग्रामीणों में भारी डर का माहौल था। सूचना मिलने पर वन विभाग ने तुरंत कार्रवाई करते हुए गांव के पास दो पिंजरे लगाए। गुरुवार-शुक्रवार की मध्यरात्रि एक तेंदुआ शिकार के लालच में पिंजरे में फंस गया, जिसे टीम ने सुरक्षित तरीके से रेस्क्यू कर लिया।
तेंदुए के पिंजरे में फंसने की सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम और बड़ी संख्या में ग्रामीण मौके पर पहुंच गए। वन विभाग ने सावधानीपूर्वक पूरे ऑपरेशन को अंजाम दिया। इस दौरान वनरक्षक भरत मेघवाल, प्रताप सिंह सहित कई ग्रामीण—कमलेश पालीवाल, शंभू सिंह, हिमत सिंह, रतन सिंह, डालू सिंह, भूपेंद्र सिंह, लक्ष्मी नारायण, लोकेश पालीवाल, कालू सिंह, विजय सिंह, मोहन सिंह आदि मौजूद रहे।
ग्रामीण कमलेश पालीवाल के अनुसार, गांव के आसपास पिछले दो दिनों से दो तेंदुओं की गतिविधियां देखी जा रही थीं, जिससे ग्रामीणों में भारी डर का माहौल था। सूचना मिलने पर वन विभाग ने तुरंत कार्रवाई करते हुए गांव के पास दो पिंजरे लगाए। गुरुवार-शुक्रवार की मध्यरात्रि एक तेंदुआ शिकार के लालच में पिंजरे में फंस गया, जिसे टीम ने सुरक्षित तरीके से रेस्क्यू कर लिया।
दूसरे तेंदुए की तलाश जारी
ग्रामीणों का कहना है कि क्षेत्र में दो तेंदुए एक साथ देखे गए थे। एक के पकड़े जाने से राहत जरूर मिली है, लेकिन दूसरे तेंदुए के खुले में होने की आशंका बनी हुई है। वन विभाग की टीम लगातार निगरानी बनाए हुए है और ग्रामीणों को विशेष रूप से रात के समय सतर्क रहने की सलाह दी गई है।
आबादी में क्यों घुस रहे तेंदुए? जानिए बढ़ती घटनाओं के पीछे के मुख्य कारण
हाल के दिनों में ग्रामीण और शहरी आबादी के पास तेंदुओं की आवाजाही की घटनाएं तेजी से बढ़ी हैं। इससे लोगों में डर और असुरक्षा का माहौल बन रहा है। वन्यजीव विशेषज्ञों और वन विभाग के अनुसार, इसके पीछे कई पर्यावरणीय और मानवीय कारण जिम्मेदार हैं।
जंगलों का सिमटना बना सबसे बड़ा कारण
विशेषज्ञों का कहना है कि तेजी से हो रहे शहरीकरण, सड़क निर्माण और खनन गतिविधियों के कारण जंगलों का क्षेत्र लगातार घट रहा है। इससे तेंदुओं का प्राकृतिक आवास प्रभावित हो रहा है और वे भोजन व सुरक्षित ठिकाने की तलाश में आबादी की ओर रुख कर रहे हैं।
भोजन की कमी से बढ़ी निर्भरता
जंगलों में शिकार की कमी भी एक बड़ा कारण है। जब प्राकृतिक शिकार (जैसे हिरण, जंगली सूअर, नीलगाय) कम हो जाते हैं, तो तेंदुए आसान शिकार की तलाश में गांवों की ओर आते हैं, जहां पालतू पशु और कचरे के आसपास मिलने वाले जानवर उन्हें आकर्षित करते हैं।
पानी और मौसम का प्रभाव
गर्मी के मौसम में जल स्रोत सूखने लगते हैं, जिससे तेंदुए पानी की तलाश में आबादी के करीब पहुंच जाते हैं। कई बार खेतों के पास बने कुएं, तालाब और नलकूप उनके लिए आकर्षण का केंद्र बनते हैं।
मानव गतिविधियों में बढ़ोतरी
जंगल क्षेत्रों में लगातार मानव दखल, लकड़ी कटाई, चराई और पर्यटन गतिविधियों से वन्यजीवों का प्राकृतिक संतुलन बिगड़ रहा है। इससे तेंदुए जैसे जानवर अपने पारंपरिक क्षेत्र छोड़ने को मजबूर हो जाते हैं।
कचरा और खुले पशु भी वजह
गांवों और शहरों में खुले में फेंका गया कचरा, आवारा कुत्ते और बिना सुरक्षा के बंधे पशु तेंदुओं को आकर्षित करते हैं। ये उनके लिए आसान शिकार साबित होते हैं।
क्या कहते हैं अधिकारी
“ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए जंगलों का संरक्षण, शिकार प्रजातियों की सुरक्षा और लोगों में जागरूकता जरूरी है। सायरा क्षैत्र में तेंदुए के मूवमेंट के पीछे कुंभलगढ़ सेंचुरी का नजदीक होना भी एक प्रमुख कारण है। सेंचुरी से सटे गांव के ग्रामीणों को रात के समय सतर्क रहने, बच्चों और पशुओं को सुरक्षित रहने की जरूरत है”