गोगुंदा: उपखंड क्षेत्र की ग्राम पंचायत मोडी के वेलावतों की भागल में पुश्तैनी रास्ते को लेकर चल रहा विवाद गुरुवार को उस समय गंभीर रूप ले गया, जब गांव के वृद्ध अंबाव सिंह राजपूत के निधन के बाद उनकी अंतिम यात्रा श्मशान घाट तक नहीं पहुंच सकी। आरोप है कि विवादित मार्ग पर एक पक्ष द्वारा कांटेदार झाड़ियां डालकर रास्ता अवरुद्ध कर दिया गया, जिससे अर्थी आगे नहीं बढ़ पाई।



सूचना मिलने पर पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे और दोनों पक्षों के बीच समझाइश का प्रयास किया। हालांकि, दूसरे पक्ष ने उक्त भूमि को अपनी खातेदारी बताते हुए कोर्ट की निषेधाज्ञा का हवाला दिया और रास्ता देने से इनकार कर दिया। बाद में प्रशासन की मध्यस्थता से वैकल्पिक मार्ग से अर्थी को खेतों और नाले के रास्ते श्मशान घाट तक पहुंचाया गया।
इनका कहना है
“वर्षों से इसी मार्ग से श्मशान घाट तक आवाजाही होती रही है। गांव के एक बुजुर्ग की मृत्यु के बाद कुछ लोगों ने जानबूझकर रास्ते में कांटे और झाड़ियां डाल दीं, जिससे विवाद बढ़ गया। प्रशासन की समझाइश के बावजूद समाधान नहीं होने से ग्रामीणों में भारी आक्रोश है”
गोविंद सिंह राजपूत, मोडी
“जिस मार्ग से अर्थी ले जाई जा रही थी, वह मेरी खातेदारी भूमि है, जिस पर न्यायालय की निषेधाज्ञा लागू है। कुछ लोग निजी स्वार्थ के चलते जबरन उनकी जमीन से रास्ता निकालना चाहते हैं, जबकि पुश्तैनी रास्ता पहले से खुला हुआ है।
प्रताप सिंह राजपूत, मोडी
“सूचना मिलने पर तहसीलदार के साथ मौके पर पहुंचे और दोनों पक्षों के बीच समझाइश की। खातेदारी भूमि और न्यायालय की निषेधाज्ञा को देखते हुए ग्रामीणों को पूर्व में उपयोग हो रहे वैकल्पिक मार्ग से श्मशान जाने के लिए कहा गया, जिसके बाद स्थिति को शांत कराया गया”
श्याम सिंह चारण, थानाधिकारी गोगुंदा