प्राइम टाइम/गोगुंदा: सर पदमपत सिंघानिया विश्वविद्यालय (एसपीएसयू), उदयपुर के बौद्धिक संपदा अधिकार (आईपीआर) सेल द्वारा बुधवार को “बौद्धिक संपदा अधिकार एवं कपिला योजना जागरूकता” विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला का सफल आयोजन किया गया।
इस कार्यशाला का उद्देश्य संकाय सदस्यों, शोधार्थियों, विद्यार्थियों, नवप्रवर्तकों एवं उद्यमियों को बौद्धिक संपदा अधिकारों (के महत्व के प्रति जागरूक करना था। कार्यक्रम में पेटेंट, कॉपीराइट, ट्रेडमार्क, डिज़ाइन संरक्षण, प्रौद्योगिकी हस्तांतरण तथा नवाचारों के व्यावसायीकरण जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तृत जानकारी दी गई।
साथ ही भारत सरकार की कपिला योजना एवं नवाचार, पेटेंट फाइलिंग तथा तकनीकी व्यावसायीकरण को बढ़ावा देने में इसकी भूमिका पर भी प्रकाश डाला गया।
कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन एवं स्वागत संबोधन के साथ हुआ। इसके पश्चात एसपीएसयू के माननीय अध्यक्ष डॉ. संजय सिन्हा, प्रो. (डॉ.) प्रसून चक्रवर्ती, प्रो-प्रेसिडेंट (रिसर्च एवं अकादमिक) तथा प्रो. अमित कुमार गोयल, अधिष्ठाता, स्कूल ऑफ इंजीनियरिंग साइंसेज़ (SES) ने अपने उद्घाटन उद्बोधन में बौद्धिक संपदा के संरक्षण, अनुसंधान में नवाचार को प्रोत्साहन तथा शोध आधारित नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र को सशक्त बनाने की आवश्यकता पर बल दिया। कार्यक्रम की रूपरेखा एवं उद्देश्य की जानकारी आईपीआर सेल के अध्यक्ष डॉ. कमल कांत हिरण द्वारा प्रस्तुत की गई।
कार्यशाला के तकनीकी सत्रों में भारतीय पेटेंट एजेंट एवं पंजीकृत SIPP फैसिलिटेटर डॉ. जगदीश लोहार ने उपयोगिता (Utility) एवं डिज़ाइन पेटेंट से संबंधित अवधारणाओं को वास्तविक उदाहरणों के माध्यम से सरलता से समझाया। वहीं डॉ. मयंक पटेल, प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष, कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग विभाग, गीतांजलि इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्निकल स्टडीज़, उदयपुर ने पेटेंट फाइलिंग प्रक्रिया, बौद्धिक संपदा संरक्षण, शोध के व्यावसायीकरण, प्रौद्योगिकी हस्तांतरण तथा कपिला योजना के अंतर्गत उपलब्ध अवसरों पर विस्तृत जानकारी प्रदान की।
इस कार्यशाला में विश्वविद्यालय के संकाय सदस्यों, शोधार्थियों, विद्यार्थियों एवं नवप्रवर्तकों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। कार्यक्रम ने एसपीएसयू की नवाचार, उद्यमिता एवं बौद्धिक संपदा जागरूकता को बढ़ावा देने की प्रतिबद्धता को और अधिक सुदृढ़ किया।
कार्यक्रम के सफल आयोजन में आईपीआर सेल की टीम के सदस्य डॉ. पूनम सैनी, डॉ. चांदनी जोशी, डॉ. लोकेश गुप्ता एवं डॉ. बृजेश शर्मा का विशेष योगदान रहा।