गोगुंदा। कस्बे के ब्रह्मपुरी स्थित वर्धमान स्थानकवासी जैन स्थानक में सोमवार को चातुर्मास के अंतर्गत आयोजित धर्मसभा में बड़ी संख्या में श्रावक-श्राविकाओं ने भाग लेकर धर्मलाभ अर्जित किया। धर्मसभा में महाश्रमण पूज्य गुरुदेव जिनेन्द्र मुनि काव्यतीर्थ ने नवकार महामंत्र की महिमा का विस्तार से वर्णन करते हुए कहा कि ‘नमो’ शब्द समर्पण, श्रद्धा और विनम्रता का प्रतीक है। उन्होंने बताया कि नवकार महामंत्र के प्रत्येक पद की शुरुआत ‘नमो’ शब्द से होती है, जो आत्मकल्याण एवं आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग प्रशस्त करता है।
उन्होंने बड़ी साधु वंदना के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि तपस्या के दौरान बड़ी साधु वंदना करने से साधकों को आध्यात्मिक शांति एवं साता की प्राप्ति होती है, जिससे उनकी साधना और अधिक प्रभावी बनती है।
धर्मसभा में साध्वी सुलक्षणा जी महाराज ने प्रवचन देते हुए बताया कि बड़ी साधु वंदना की रचना जयमल जी महाराज द्वारा की गई थी। उन्होंने कहा कि इसके नियमित जाप से कर्मों की निर्जरा होती है तथा मोक्ष मार्ग की प्राप्ति का मार्ग प्रशस्त होता है।
चातुर्मास संयोजक सुंदरलाल मेहता ने श्रद्धालुओं से चातुर्मास के दौरान अधिकाधिक धर्म आराधना, तप, स्वाध्याय एवं प्रवचनों से जुड़ने का आह्वान किया। वहीं प्रचार-प्रसार समिति के गोपाल लोढ़ा ने सभी धर्मप्रेमियों से नियमित रूप से प्रवचन, प्रार्थना, नवकार महामंत्र जाप एवं अन्य धार्मिक आयोजनों में सक्रिय सहभागिता निभाने की अपील की।
धर्मसभा में तेरापंथ सभा के सदस्यों सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे। कार्यक्रम के अंत में महाश्रमण पूज्य गुरुदेव जिनेन्द्र मुनि काव्यतीर्थ ने मंगल पाठ के साथ धर्मसभा का समापन किया।