प्राइम टाइम/गोगुंदा: महिला एवं बाल विकास विभाग, उदयपुर ने सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में लापरवाही बरतने वाले कार्मिकों के खिलाफ सख्त रुख अपनाते हुए अनुशासनात्मक कार्रवाई की है। गोगुंदा उपखण्ड अधिकारी शुभम भैसारे एवं सायरा तहसीलदार सुरेश मेहता द्वारा किए गए आकस्मिक निरीक्षण में गंभीर अनियमितताएं सामने आने पर आंगनबाड़ी केंद्र सिंघाड़ा (सेक्टर सायरा) की कार्यकर्ता श्रीमती मंजू नंगारची की मानदेय सेवाएं तत्काल प्रभाव से समाप्त कर दी गई हैं।
निरीक्षण में उजागर हुई गंभीर खामियां
प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा 15 जनवरी 2026 तथा बाल विकास परियोजना अधिकारी (CDPO) द्वारा 16 फरवरी 2026 को किए गए निरीक्षण में कई गंभीर लापरवाहियां सामने आईं—
नियमों की अनदेखी: केंद्र पर आवश्यक सरकारी रिकॉर्ड का संधारण नहीं किया गया, जो विभागीय नियमों का उल्लंघन है।
पोषण वितरण में गड़बड़ी: केंद्र पर दूध का स्टॉक आवश्यकता से अधिक पाया गया, जिससे स्पष्ट हुआ कि बच्चों को नियमित रूप से दूध वितरित नहीं किया जा रहा था।
अभिलेखों की कमी: स्टॉक रजिस्टर एवं अन्य जरूरी दस्तावेज अद्यतन नहीं पाए गए।
योजनाओं में लापरवाही: पोषण ट्रैकर, प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना (PMMVY) एवं लाभार्थियों के आधार सत्यापन का कार्य अत्यंत कमजोर पाया गया।
साफ-सफाई की स्थिति खराब: केंद्र पर गंदगी पाई गई, जिससे बच्चों में बीमारी फैलने की आशंका बनी रहती है।
ओवर स्टॉक की समस्या: आवश्यकता से अधिक पोषाहार सामग्री जमा होने से उसके खराब होने और सरकारी नुकसान की संभावना पाई गई।
सुनवाई के बाद लिया गया फैसला
विभाग द्वारा नियमानुसार 18 फरवरी 2026 को संबंधित कार्यकर्ता को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था। निर्धारित समय में संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर स्मरण पत्र भी भेजा गया। अंततः 10 मार्च 2026 को प्रस्तुत जवाब असंतोषजनक पाए जाने पर विभाग ने कड़ी कार्रवाई करते हुए सेवाएं समाप्त करने का निर्णय लिया।
प्रशासन का संदेश:
विभाग ने स्पष्ट किया है कि सरकारी योजनाओं में लापरवाही किसी भी स्तर पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी। भविष्य में भी ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई जारी रहेगी, ताकि योजनाओं का लाभ पात्र लोगों तक सही तरीके से पहुंच सके।