प्राइम टाइम/डेस्क: जयपुर, 18 फरवरी। ऊर्जा राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) हीरालाल नागर ने बुधवार को विधानसभा में कहा कि जले हुए ट्रांसफार्मरों को बदलने के लिए डिस्कॉम द्वारा प्रत्येक सब-डिवीजन स्तर पर एक-एक लिफ्टर की व्यवस्था की गई है। उन्होंने कहा कि किसानों द्वारा स्वयं ट्रांसफार्मर परिवहन कराने पर 700 रुपये के मानदेय को बिल में समायोजित करने की व्यवस्था है। उन्होंने आश्वस्त किया कि इस व्यवस्था को और सुदृढ़ किया जाएगा। साथ ही इस राशि की अदायगी में किसी भी प्रकार की अनियमितता पाए जाने पर विभागीय जांच करवाई जाएगी।
उन्होंने बताया कि लिफ्टरों के माध्यम से जले हुए ट्रांसफार्मरों को लाने-ले जाने तथा बदलने की जिम्मेदारी संबंधित लिफ्टर संवेदक को सौंपी गई है। कई बार किसान फसल खड़ी होने के कारण 72 घंटे से कम समय में ट्रांसफार्मर बदलवाना चाहते हैं। ऐसी स्थिति में, लिफ्टर खराब होने या उपलब्ध न होने पर किसान द्वारा स्वयं अपने स्तर पर ट्रांसफार्मर को लाने एवं ले जाने की व्यवस्था की जाती है। विभाग द्वारा परिवहन के एवज में 700 रुपये उपभोक्ता के बिल में समायोजित कर दिया जाता है।
ऊर्जा राज्य मंत्री प्रश्नकाल के दौरान विधायक राजेंद्र द्वारा इस संबंध में पूछे गए पूरक प्रश्नों का जवाब दे रहे थे। उन्होंने बताया कि नगरीय क्षेत्रों में भूमिगत विद्युत लाइन बिछाने का कार्य स्थानीय नगर निकायों द्वारा कराया जाता है। नगर निकायों के अनुरोध पर विद्युत निगम द्वारा विस्तृत परियोजना प्रतिवेदन (डीपीआर) तैयार कर प्रस्तुत किया जाता है एवं निकाय द्वारा निर्धारित राशि जमा कराने पर ही निगम भूमिगत लाइन बिछाने का कार्य करता है। उन्होंने कहा कि एक बार अवसंरचना स्थापित होने के बाद भूमिगत लाइन का कार्य विद्युत निगम द्वारा नहीं किया जाता है। ख़राब एवं क्षतिग्रस्त विद्युत् लाइन के सम्बन्ध में उन्होंने स्पष्ट किया कि पूर्वर्ती सरकार के समय किये गए टेंडरों में गुणवत्ता मानकों के अनुरूप कार्य नहीं पाए जाने की शिकायत मिलने पर दोषी के विरुध्द आवश्यक कार्यवाही की जाएगी।