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October 25, 2026 3:27 am

गोगुंदा में बिना सूचना पशुबाड़ा तोड़ने का आरोप, ग्रामीणों ने लगाई न्याय की गुहार

प्राइम टाइम: गोगुंदा पंचायत समिति क्षेत्र में पशुपालकों द्वारा उपयोग में ली जा रही जमीन पर कार्रवाई को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। ग्राम गोगुंदा के कई ग्रामीणों ने ब्लॉक स्तरीय जनसुनवाई अधिकारी को ज्ञापन सौंपकर आरोप लगाया कि बिना पूर्व सूचना उनके पशुबाड़े को तोड़ दिया गया, जिससे उन्हें भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा।
ज्ञापन में ग्रामीणों ने बताया कि वे लंबे समय से आराजी संख्या 437 की भूमि का उपयोग पशुपालन के लिए करते आ रहे हैं। उनका कहना है कि वे अनुसूचित जाति वर्ग से हैं और पशुपालन ही उनकी आजीविका का मुख्य साधन है। इसी भूमि पर उन्होंने पशुओं के लिए पत्थर के कोट और कच्चे मकान भी बना रखे थे।
ग्रामीणों के अनुसार, 30 मई 2026 को तहसील कार्यालय की ओर से नोटिस जारी किया गया था, लेकिन यह केवल कुछ ही लोगों को मिला। इसके बाद 10 जून 2026 को दोपहर करीब 1 बजे, जब वे मजदूरी पर गए हुए थे, उसी दौरान जेसीबी मशीन से उनका पशुबाड़ा बिना किसी पूर्व सूचना के हटा दिया गया। इस कार्रवाई से प्रत्येक प्रभावित परिवार को करीब 2 से 3 लाख रुपये तक का नुकसान होने का दावा किया गया है।
ग्रामीणों ने यह भी बताया कि संबंधित भूमि राजस्व रिकॉर्ड में रास्ता दर्ज है, लेकिन वहां से किसी गांव या मोहल्ले के लिए मार्ग नहीं जाता। इसके बावजूद उन्होंने 20 फीट चौड़ा रास्ता सार्वजनिक उपयोग के लिए छोड़ रखा है, जिस पर आज तक कोई विवाद नहीं हुआ।
पीड़ितों ने आरोप लगाया कि यह कार्रवाई राजनीतिक दबाव में की गई है। उन्होंने प्रशासन से मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करने और उन्हें उसी स्थान पर या अन्यत्र पशुबाड़ा बनाने के लिए भूमि उपलब्ध कराने की मांग की है।

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