प्राइम टाइम/डेस्क: राजस्थान के बहुचर्चित 960 करोड़ रुपये के जल जीवन मिशन (जेजेएम) घोटाले में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो द्वारा अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई की गई है। इस घोटाले की आंच अब नौकरशाही के शीर्ष तक पहुंच गई है। एसीबी ने प्रदेश के कद्दावर पूर्व आईएएस अधिकारी सुबोध अग्रवाल के खिलाफ ‘लुक आउट नोटिस’ जारी कर दिया है।
सुबोध अग्रवाल पर कसता जा रहा है शिकंजा
लंबे समय तक जलदाय विभाग के प्रमुख रहे सुबोध अग्रवाल का नाम इस घोटाले की जांच में मुख्य गुप से उभरा है। एसीबी को खुफिया इनपुट मिला है कि कानूनी कार्रवाई से बचने के लिए पूर्व आईएएस देश छोड़कर विदेश भाग सकते हैं। इसी के चलते सभी एयरपोर्ट्स और बंदरगाहों को अलर्ट कर दिया गया है। गौरतलब है कि 17 फरवरी को एसीबी की टीम ने सुबोध अग्रवाल के आवास पर छापेमारी की थी, लेकिन वे वहां नहीं मिले। तभी से उनकी तलाश तेज कर दी गई है।
घोटाले में 9 अफसर 3 दिन की रिमांड पर
इस मामले में मंगलवार को गिरफ्तार किए गए पीएचईडी के 9 अधिकारियों को बुधवार जयपुर में एसीबी की विशेष अदालत में पेश किया गया। एसीबी की टीम सभी आरोपियों को लेकर सुरक्षा के बीच कोर्ट पहुंची। एसीबी ने भ्रष्टाचार के गहरे नेटवर्क और दस्तावेजों की बरामदगी के लिए कोर्ट से 5 दिन की रिमांड मांगी थी, लेकिन अदालत ने तथ्यों को देखते हुए 3 दिन की रिमांड मंजूर की है।
रिमांड में खुलेंगे कई बड़े राज
अब अगले तीन दिनों तक एसीबी इन अधिकारियों से आमने-सामने बिठाकर पूछताछ करेगी। जांच का मुख्य केंद्र निम्नलिखित बिंदु होंगे।
फर्जी सर्टिफिकेट का खेल: किन अधिकारियों के इशारे पर ‘इरकॉन’ के फर्जी दस्तावेजों को मंजूरी दी गई?
घटिया पाइप और भुगतान: काम पूरा न होने के बावजूद ठेकेदारों को करोड़ों का भुगतान कैसे कर दिया गया?
सिंडिकेट का ‘आका’: इस घोटाले की रकम किन-किन रसूखदारों और नेताओं तक पहुंची?
भ्रष्टाचार की ‘बहती गंगा’ में सबने धोए हाथ
एसीबी की अब तक की जांच से साफ है कि जल जीवन मिशन, जिसका उद्देश्य हर घर तक पानी पहुंचाना था, अधिकारियों के लिए कमाई का जरिया बन गया। 960 करोड़ के इस टेंडर घोटाले में फर्जीवाड़ा इस कदर हावी था कि तकनीकी और प्रशासनिक मापदंडों को पूरी तरह दरकिनार कर दिया गया।