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August 28, 2026 12:40 pm

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मेवाड़ की सदियों पुरानी परम्परा पुनः जीवंत कर डॉ. लक्ष्यराज सिंह मेवाड़ ने श्री जगन्नाथ रायजी को अर्पित किए पोशाक व भोग

उदयपुर, 15 जुलाई: मेवाड़ की गौरवशाली एवं शताब्दियों पुरानी धार्मिक परम्परा का निर्वहन करते हुए मेवाड़ के 77वें श्री एकलिंग दीवान डॉ. लक्ष्यराज सिंह मेवाड़ ने पूर्ण श्रद्धाभाव से श्री जगदीश मंदिर में विराजित ठाकुरजी श्री जगन्नाथ रायजी को रथयात्रा महोत्सव के उपलक्ष्य में पारम्परिक पोशाक एवं भोग-प्रसाद सामग्री श्रद्धापूर्वक अर्पित की। परम्परानुसार भगवान श्री जगन्नाथ रायजी को धारण कराई जाने वाली यह विशेष पोशाक राजमहल से धार्मिक शोभायात्रा के साथ मंदिर पहुँचाई गई।

इस अवसर पर राजमहल से श्री जगदीश मंदिर तक पारम्परागत शोभायात्रा निकाली गई। शोभायात्रा के अग्रभाग में सुरक्षाकर्मियों की टुकड़ी अनुशासित परेड करती हुई चल रही थी। उनके पीछे पैलेस बैण्ड मधुर स्वरलहरियाँ प्रस्तुत करता हुआ आगे बढ़ रहा था। धर्मसभा के सदस्य एवं पंडितगण पारम्परिक पोशाक तथा भोग-प्रसाद के थाल सुव्यवस्थित रूप से लेकर मंदिर पहुँचे। शोभायात्रा में चँवरदार परम्परानुसार चँवर सेवा करते हुए चल रहे थे, जबकि छड़ीदार अग्रभाग में राजपरम्परा का निर्वहन कर रहे थे। श्रद्धालु भगवान श्री एकलिंगनाथ एवं भगवान श्री जगन्नाथ रायजी के जयघोष करते हुए राजमहल से जगदीश चौक होते हुए मंदिर पहुँचे।

उल्लेखनीय है कि इस ऐतिहासिक मंदिर का निर्माण मेवाड़ के 57वें श्री एकलिंग दीवान महाराणा जगत सिंह प्रथम द्वारा कराया गया था तथा इसकी प्रतिष्ठा विक्रम संवत् 1709 की वैशाख पूर्णिमा को सम्पन्न हुई थी। तभी से मेवाड़ के महाराणाओं द्वारा यहाँ धार्मिक अनुष्ठानों, उत्सवों, दान-पुण्य एवं दैनिक पूजन-सेवा की गौरवशाली परम्परा का सतत निर्वहन किया जाता रहा है। अपने पूर्वजों की इसी समृद्ध विरासत का अनुसरण करते हुए डॉ. लक्ष्यराज सिंह मेवाड़ आज भी पूर्ण श्रद्धा एवं आस्था के साथ इन परम्पराओं का संरक्षण एवं संवर्धन कर मेवाड़ की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक धरोहर को जीवंत बनाए हुए हैं।

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