प्राइम टाइम/गोगुंदा: राजस्थान में होली सिर्फ एक त्योहार नहीं, बल्कि संस्कृति, परंपरा और आतिथ्य का वह रंग है जो सबको बांध लेता है। गोगुंदा उपखंड के कई गांवों में छठ को होली खेली जाती है लेकिन खाखड़ी में यह पर्व भव्यता और अनूठी परंपराओं के साथ मनाया जाता है यहां होली के दूसरे दिन खूब जमकर गैर नृत्य होता है और लोग एक दूसरे को बधाई देते है। होली में परंपरा और संस्कृति का अद्भुत संगम दिखता है।
ढोल, नगाड़ों और की थाप पर ग्रामीण भी जमकर थिरकते है। रंगों की बौछार के बीच स्थानीय युवाओं ने उत्साह के साथ ग्रामीणों ने एक दूसरे को गुलाल लगाया और शुभकामनाएं दीं।
घर घर जाकर लगाए जाते है रंग, होती है ऐतिहासिक गैर नृत्य
गोगुंदा के कई गांवों होली पर कई ऐतिहासिक परंपराएं निभाई जाती है। खाखड़ी में गांव के सभी ग्रामीण चोरे पर एकत्रित होते है और वहां गैर नृत्य करते है उसके बाद जिनके घर नवजात का जन्म होता है वहां जाकर उसके घर के बाहर गैर नृत्य किया जाता है। साथ ही जिनके घर किसी का निधन होता है वहां भी जाकर उन्हें होली का रंग लगाया जाता है और इस खुशी में शामिल किया जाता है। गांव के ठाकुर रमेंद्र सिंह बाघेला और युवराज सिंह बाघेला बताते है कि ये रश्म सदियों से चली आ रही है। पूरे दिन होली के रंग लगाए जाते है और शाम को खूब गैर खेली जाती है।

बरसो बाद उमड़े एक साथ इतने ग्रामीण, कायम की अनूठी एकता की मिसाल
गांव के युवराजसिंह बाघेला बताते है कि उनके 55 वर्ष के जीवनकाल में खाखड़ी में इतने लोग कभी धुलंडी में एक साथ नहीं दिखे। वो कहते है कि इस बार लोगो ने गांव की एकता में सम्पूर्ण समय दिया और हर समाज के लोगो में होली को लेकर खासा उत्साह देखने को मिला।