गोगुंदा। कस्बे के ब्रह्मपुरी स्थित वर्धमान स्थानकवासी जैन स्थानक में शुक्रवार को आध्यात्मिक चातुर्मास के तहत धर्मसभा का आयोजन हुआ। धर्मसभा में साधु-साध्वियों ने रक्षाबंधन पर्व की धार्मिक एवं आध्यात्मिक महत्ता पर प्रकाश डालते हुए श्रद्धालुओं को संयम, सदाचार और धर्म की राह पर चलने का संदेश दिया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रावक-श्राविकाओं ने उपस्थित होकर प्रवचनों का लाभ लिया।
धर्मसभा को संबोधित करते हुए महाश्रमण पूज्य गुरुदेव जिनेन्द्र मुनि काव्यतीर्थ ने रक्षाबंधन पर्व के महत्व पर प्रकाश डालते हुए भाई-बहन के पवित्र रिश्ते और रक्षा सूत्र की धार्मिक भावना को समझाया। उन्होंने कहा कि पर्व केवल परंपराओं तक सीमित नहीं हैं, बल्कि इनके पीछे आत्मिक शुद्धि, प्रेम, सद्भाव और संयम का संदेश भी निहित है।
साध्वी राजश्री जी ने रक्षाबंधन के धार्मिक एवं ऐतिहासिक प्रसंगों की जानकारी देते हुए भगवान कृष्ण और द्रौपदी से जुड़े प्रसंग का उल्लेख किया। उन्होंने श्रद्धालुओं को आगामी पर्यूषण पर्व के दौरान अखंड नवकार जाप एवं सामूहिक तेल नवकार जाप में सहभागी बनने के लिए प्रेरित किया।
साध्वी सुलक्षणा प्रभा ने शास्त्र ज्ञान, आगम अध्ययन एवं साधु वंदना के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने श्रद्धालुओं से नियमित रूप से धर्म आराधना और आध्यात्मिक गतिविधियों से जुड़ने का आह्वान किया।
धर्मसभा के संयोजक सुंदरलाल मेहता ने बाहर से आए अतिथियों एवं धर्मप्रेमियों का स्वागत किया। उन्होंने बताया कि चातुर्मास के दौरान नियमित प्रवचन, नवकार महामंत्र जाप सहित विभिन्न धार्मिक एवं आध्यात्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। उन्होंने धर्मप्रेमियों से अधिक से अधिक संख्या में कार्यक्रमों में शामिल होकर धर्म आराधना में सहभागिता निभाने का आह्वान किया।
इस अवसर पर तेरापंथ सभा के पदाधिकारियों सहित बड़ी संख्या में श्रावक-श्राविकाएं मौजूद रहे। समापन अवसर पर महाश्रमण पूज्य गुरुदेव जिनेन्द्र मुनि ने मंगल पाठ सुनाया और श्रद्धालुओं को धर्ममय, संयमित एवं सदाचारी जीवन जीने का संदेश दिया।

