प्राइम टाइम/गोगुंदा: उपखंड क्षेत्र के ग्रामीणों के लिए लंबे इंतजार के बाद एक बड़ी राहत की खबर सामने आई है। ग्राम मादड़ी देवस्थान (पदराडा) में पिछले 22 वर्षों से चल रहे भूमि विवाद और तीन वर्षों से अधूरे पड़े सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) भवन पर लगा स्थगन आदेश राजस्थान उच्च न्यायालय द्वारा हटा दिया गया है। न्यायालय के इस फैसले से अब अस्पताल निर्माण कार्य बिना किसी बाधा के आगे बढ़ सकेगा।

प्रशासन की प्रभावी पैरवी से मिली सफलता
इस महत्वपूर्ण मामले में उपखंड अधिकारी गोगुंदा शुभम भैसारे के निर्देशन में तहसीलदार सायरा सुरेश मेहता और भू-अभिलेख निरीक्षक सोहनलाल मेघवाल ने सक्रिय भूमिका निभाई। तहसीलदार द्वारा प्रस्तुत तथ्यात्मक रिपोर्ट और आवश्यक दस्तावेजों के आधार पर राज्य सरकार की ओर से मजबूत पैरवी की गई, जिसे न्यायालय ने स्वीकार किया।

2004 से लंबित था मामला
यह प्रकरण एस.बी. सिविल प्रथम अपील संख्या
565/2004 (भारत सिंह बनाम राजस्थान राज्य) के रूप में वर्ष 2004 से विचाराधीन था। 21 सितंबर 2004 को उच्च न्यायालय ने संबंधित भूमि पर यथास्थिति बनाए रखने का आदेश दिया था, जिसके चलते अस्पताल निर्माण कार्य रुक गया था।
न्यायालय का स्पष्ट आदेश
13 अप्रैल 2026 को हुई अंतिम सुनवाई में न्यायमूर्ति रेखा बोराणा ने आदेश देते हुए कहा कि पूर्व में जारी अंतरिम स्थगन आदेश अब स्वास्थ्य केंद्र के निर्माण और उन्नयन कार्य में बाधा नहीं बनेगा।
अपीलकर्ताओं की सहमति बनी निर्णायक
मामले में सभी आठ अपीलकर्ताओं—भारत सिंह, परशराम सहित अन्य—ने जनहित को प्राथमिकता देते हुए अस्पताल निर्माण पर अपनी अनापत्ति प्रस्तुत की और शपथ-पत्र के माध्यम से सहमति दी। साथ ही, उन्होंने अपनी अपील वापस लेते हुए शेष भूमि के सार्वजनिक उपयोग की भी अनुमति दी।
जनहित को मिली प्राथमिकता

तहसीलदार की रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया कि खसरा संख्या 1275/662 एवं 1314/662 पर निर्मित अस्पताल भवन क्षेत्र के लिए अत्यंत आवश्यक है। न्यायालय ने भी जनहित को सर्वोपरि मानते हुए निर्णय सुनाया।
ग्रामीणों में खुशी की लहर
अदालत के फैसले के बाद पदराडा और आसपास के गांवों में खुशी का माहौल है। अस्पताल का निर्माण पूर्ण होने पर क्षेत्र के हजारों लोगों को बेहतर चिकित्सा सुविधाएं स्थानीय स्तर पर ही उपलब्ध हो सकेंगी, जिससे उन्हें दूर-दराज के अस्पतालों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा।